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महाकौशल प्रान्त प्रांतीय प्रधानाचार्य बैठक

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मनुष्यत्व से देवत्व और देवत्व से मोक्ष की ओर ले जाना ही उद्देश्यः यतींद्र

मंडला। विद्या भारती महाकौशल प्रांत के प्रांतीय प्रधानाचार्य वर्ग में विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री माननीय यतींद्र ने कहा कि शिक्षा का कार्य सजीव मानव के निर्माण का कार्य है। शिक्षा और विद्या में अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि शिक्षा जीविका चलाने का साधन है, परंतु विद्या आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है। शिक्षा में कठोरता है जबकि विद्या में नम्रता और सहजता है। विद्या के माध्यम से शिष्य को तब तक समझाना जब तक उसे आत्मज्ञान न हो जाए। शिक्षा का क्षेत्र बहुत व्यापक है, समग्रता का विचार करने वाला है। शिक्षा राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए है। आत्मज्ञान और अध्यात्म की शिक्षा हमारी विशिष्टता रही है।

वास्तव में मनुष्यता से देवत्व और देवत्व से मोक्ष की ओर ले जाना ही हमारा उद्देश्य है। प्रधानाचार्य के नाते बहुउद्देशीय नेतृत्वकर्ता के रूप में अपने आप को स्थापित करें। विद्यालय के शोधपरक विकास की योग्यता विकसित करें, युगानुकूल ज्ञानात्मक विकास के साथ कौशल का विकास करें।

महाकौशल प्रांत की तीन दिवसीय प्रधानाचार्य बैठक का आयोजन 29-30 नवंबर व 1 दिसंबर को किया गया। इस अवसर पर सह संगठन मंत्री मध्य क्षेत्र डॉक्टर आनंद, प्रादेशिक सचिव डॉक्टर नरेंद्र कोष्टि, प्रांत कोषाध्यक्ष श्री विष्णुकांत ठाकुर जी का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। विद्यालय संचालन समिति के अध्यक्ष विनायक राव ताम्बे आदि उपस्थित रहे।

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