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शिक्षा में माता का स्थान प्रथम – गोविंदचंद्र महंत

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शिक्षणात आईचे स्थान प्रथम – गोविंदचंद्र महंत

सरस्वती शिशु मंदिर प्रसादनगर शाळेला भेट विद्या भारतीशी संलनता प्रमाणपत्र प्रदान

नागपूर दि. 27 जानेवारी : शिशु शिक्षणात आईचे स्थान प्रथम आणि महत्त्वाचे असते. विभिन्न क्रिया बालक आईकडून शिकतात. ज्ञानेन्द्रिय व कर्मेन्द्रिय यांमधून ज्ञानार्जनाची प्रक्रिया विकसित व्हावी यासाठी विभिन्न क्रियाकलाप केले जातात असे प्रतिपादन विद्या भारतीचे अखिल भारतीय संघटन मंत्री गोविन्द चंद्र महंत यांनी केले. सरस्वती शिशु मंदिर प्रसार नगर येथे शिक्षकांशी संवाद या कार्यक्रमात ते बोलत होते. नवदंपती शिक्षण व गर्भवती मातेच्या शिक्षणाची व्यवस्था विद्या भारतीच्या काही केन्द्रांवर प्रारंभ करण्यांत आली आहे असे ते म्हणाले. शरीर, मन, बुद्धि आणि आत्मा यांचा विकास होणे आवश्यक आहे तसेच भारतीय शिक्षण हे आध्यात्मिक आहे असेही ते म्हणाले. कार्यक्रमात संस्थेचे सचिव प्रशांत बोपर्डीकर, विद्या भारती विदर्भच्या उपाध्यक्षा सौ. प्रांजली जाशी, महानगर अध्यक्ष शैलेन्द्र मानावत, प्रांत संघटन मंत्री शैलेश जोशी, ज्येष्ठ कार्यकर्ते डॉ. संजय घटाटे उपस्थित होते. कार्यक्रमात विद्या भारतीशी संलग्नतेचे प्रमाणपत्र प्रदान करण्यात आले. कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन प्रधानाचार्या सौ. मृदुल भुते यांनी केले तर आभार प्रदर्शन संस्थेचे सचिव प्रशांत बोपर्डीकर यांनी केले. शांती मंत्राने कार्यक्रमाची सांगता झाली.

हिन्दी अनुवाद शिक्षा में माता का स्थान प्रथम – गोविंदचंद्र महंतसरस्वती शिशु मंदिर प्रसादनगर स्कूल का दौरा – विद्या भारती के साथ अनुरूपता का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया

नागपुर, 27 जनवरी :बालक की शिक्षा में माता का स्थान सर्वप्रथम है। बच्चे अपनी मां से विभिन्न गतिविधियां सीखते हैं। विद्या भारती के अखिल भारतीय केंद्रीय मंत्री गोविंद चंद्र महंत ने जोर देकर कहा कि ज्ञान और क्रिया के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया को विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ की जाती हैं।
वे सरस्वती शिशु मंदिर प्रसार नगर में शिक्षकों के साथ संवाद नामक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के कुछ केंद्रों पर नवविवाहित जोड़े की पढ़ाई और गर्भवती महिलाओं की पढ़ाई की व्यवस्था शुरू की गई है.
उन्होंने कहा कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास होना चाहिए और भारतीय शिक्षा आध्यात्मिक है। कार्यक्रम में संस्था के सचिव प्रशांत बोपर्डीकर, विदर्भ की विद्या भारती उपाध्यक्ष श्रीमती. प्रांजलि जशी, महानगर अध्यक्ष शैलेंद्र मनावत, प्रांतीय केंद्रीय मंत्री शैलेश जोशी, वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. संजय घाटाटे मौजूद थे।
कार्यक्रम में विद्या भारती से संबद्धता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संयोजन प्राचार्या श्रीमती सुषमा ने किया।मृदुल भूटे ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संगठन के सचिव प्रशांत बोपर्डीकर ने किया। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ।

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