जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वप्न एक भारत श्रेष्ठ भारत को साकार करने के उद्देश्य से विद्या भारती संस्थान, जयपुर द्वारा संचालित श्री बलराम उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मन्दिर,बस्सी में “भाषा की कक्षा” नामक एक अनोखी पहल गत दो वर्षों से संचालित की जा रही है। जहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थी अब अपने दैनिक जीवन में बोलचाल के वाक्यों का 22 भाषाओं में उपयोग कर रहे हैं। विद्यालय में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों पर अतिथियों का स्वागत अलग-अलग भाषाओं में वहाँ की सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप करते हैं। पिछले दो वर्षों में इस कक्षा के माध्यम से बालकों के व्यक्तित्व में भी विकास हुआ है। अब वे विभिन्न त्योहारों की बधाई,स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर शुभकामनाएं भी देश के अलग-अलग राज्यों में प्रचलित 22 भाषाओं में देते हैं। इस कक्षा के माध्यम से बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए काम किया जा रहा है। इस कक्षा के माध्यम से बालकों के लिए करियर के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। इस कक्षा का शुभारंभ 12 जनवरी 2022 को हुआ था।
यह देश का पहला ऐसा अनोखा विद्यालय है जिसमें विद्या मंदिर के छात्रों को अलग-अलग भाषाओं का बोध कराने एवं उन राज्यों की संस्कृति से परिचय कराने के लिए भाषा की कक्षा की शुरुआत की गई है। इस कक्षा में बालक-बालिकाएं स्वतः रुचि लेकर अध्ययन करते हैं। इसके तहत बच्चे देश के अलग-अलग भागों में प्रचलित सभी 22 भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। यह विद्यालय देश में एक भारतीय भाषा केंद्र के रुप में आकार ले रहा है। जहाँ अध्ययनरत विद्यार्थी इन भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करके अपने व्यक्तित्व में तो निखार ला ही रहे हैं साथ ही भविष्य की सम्भावनाओं के रास्ते भी खोल रहे हैं और कक्षा के माध्यम से बालकों को वहाँ की संस्कृति से भी परिचित करवाया जा रहा है। विद्या मंदिर के पूर्व छात्र एवं इस भाषा की कक्षा के संयोजक प्रिंस तिवाड़ी ने बताया कि कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए दैनिक जीवन में आम-बोलचाल के वाक्यों को 22 अलग-अलग भाषाओं में 400 से अधिक वाक्यों की बुकलेट तैयार की गई है।
खास बात यह है इसमें हिन्दी, असमिया, बंगाली, बोडो, तमिल, तेलुगु, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयाली, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, डोगरी आदि भाषाओं के बारे में छात्रों को बताया जा रहा है।
प्रिंस का कहना है कि अब बच्चों को देश के किसी भी राज्य में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने,वहाँ जॉब करने में भाषा के सबंध में आने वाली कठिनाइयों का सामाधान भी मिलेगा और उनके करियर के लिए भी ओर भी नए रास्ते खुलेंगे। बालक इस कक्षा के माध्यम से भाषा के क्षेत्र में अपना करियर भी बना सकेंगे। आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य श्री लालचंद शर्मा ने बताया की भाषा की कक्षा के तहत प्रतिदिन किसी एक भाषा से संबंधित बोलचाल के शब्द और संवाद से जुड़ी पंक्तियां विद्यार्थियों को बतायी जाती है, जिसका उपयोग बालक अपने दैनिक जीवन में दिनचर्या में उपयोग करते हैं। इस भाषा की कक्षा की विशेषता यह भी है कि इसमें बच्चे देवनागरी लिपि के माध्यम से ही पढ़कर अन्य भाषाएँ सीख रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यह शुरुआत की गई है। इस भाषा की कक्षा से जहां विद्यार्थी भारत देश में बोली जाने वाली भाषाओं को सीख रहे है वहां उनमें अन्य राज्यों में रोजगार स्वरोजगार करने में आने वाली भाषाई समस्या से बाहर आते हुए उनके आत्मविश्वास का संवर्धन होते हुए भी दिख रहा है। साथ ही विद्यार्थी इसे सामान्य प्रक्रिया से नही सीख बल्कि आपसी समूह चर्चा, आपसी संवाद और विद्यालय में होने वाले कार्यक्रमों में अपनी पकड़ की भाषा में संवाद और प्रतियोगिता के माध्यम से भी सीख रहे है। पिछले दो वर्षों में विद्यालय से पास होने विद्यार्थियों के साथ जिन विद्यार्थियों ने इसे मन से सीखा आज उनके पास अपनी मातृभाषा के शब्दकोश के अतिरिक्त अलग अलग भाषा का शब्दकोष भी तैयार हो गया है, इससे विद्यार्थियों के आत्मविश्वास का संवर्धन हुआ है।






