Home उच्च शिक्षा नोएडा में शिक्षा तथा विकास अध्ययन संस्थान का भूमि पूजन

नोएडा में शिक्षा तथा विकास अध्ययन संस्थान का भूमि पूजन

208
0
Bhoomi Pujan of Institute of Education and Development Studies in Noida

उच्च शिक्षा में ‘स्व’ आधारित व्यवस्था तैयार करें- डॉ. कृष्ण गोपाल

भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार का तर्कों व तथ्यों के साथ प्रत्युत्तर दें

नोएडा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संसाधन एवं शोध केंद्र ‘शिक्षा तथा विकास अध्ययन संस्थान’ का भूमि पूजन सेक्टर-145 नोएडा में 14 फरवरी 2024 को किया। डा. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान का भूमि पूजन केवल सामान्य भूमि पूजन नही है, यह भारत की उच्च शिक्षा में स्व के बोध की आधारशिला है जो भविष्य में उच्च शिक्षा की दिशा तय करेगी।

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने उच्च शिक्षा में ‘स्व’ आधारित व्यवस्था को तैयार करने, शोध आधारित सत्य को सामने लाने एवं विदेशी बुद्धिजीवियों द्वारा भारत के विरुद्ध चलाए जा रहे दुष्प्रचार का तर्कों व तथ्यों के साथ प्रत्युत्तर देने के लिए गहन शोध हेतु राष्ट्रीय सोच वाले बुद्धिजीवियों को आगे आने का आह्वान किया। आज के युवा को स्व का बोध नहीं है। उसको पता नहीं है कि हम क्या थे, हमारा इतिहास कितना गौरवमयी व वैज्ञानिक था और यह सब सुनियोजित ढंग से किया गया। यहां के युवाओं के मन में अपने ही देश की बातों के लिए हीनभावना पैदा की गई। जैसे संस्कृत के बारे में प्रचारित किया गया कि संस्कृत एक मृत भाषा है, उसका कोई भविष्य नहीं है। डा. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि केवल लंबी चौड़ी रोड और कंपनी बनने से देश का विकास नहीं होगा, भारत का विकास शिक्षा से होगा।

आने वाली पीढ़ी को सभी विषयों की शिक्षा के साथ संस्कार भी देंने होंगे। हम सबको पढ़ाया गया है कि सर्जरी विदेश की खोज है और आज विदेशी शिक्षा पद्धति से भारत में शिक्षा दी जाती है पर यह सभी पद्धतियां भारत की हैं। हमको शल्य चिकित्सा के जनक सुश्रुत के बारे में नहीं बताया गया है। सुश्रुत ने विश्व की पहली सर्जरी की थी। हमारे देश की पांडुलिपियों में बहुत कुछ छिपा है पर कोई पढना नहीं चाहता है जबकि विदेशी इस पर शोध कर रहे हैं। संस्थान के मंत्री प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा ने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो भौतिक उन्नति के साथ धर्म आधारित हो। भारत की सारी ज्ञान व्यवस्था धर्मशास्त्र, संस्कृत, पूजा पद्धति और दर्शन की बात भी करती है, यही भारतीय ज्ञान व्यवस्था का रूप है।

स्थान के अध्यक्ष प्रो. कैलाशचंद्र शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने एवं शोध हेतु समाज पोषित एक स्वतंत्र शोध संस्थान की आवश्यकता जताई। संस्थान के कोषाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत शर्मा ने सपत्नीक भूमि पूजन में सहभागिता की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय, संगठन के उपाध्यक्ष श्री प्रकाश, संगठन महामंत्री श्री के. एन. रघुनंद, इग्नू की प्रोवीसी प्रो. किरण हजारिका, प्रेरणा शोध संस्थान के अध्यक्ष श्री मधुसूदन दादू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर, भारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री श्री वी. सतीश आदि उपस्थित रहे। संचालन विद्या भारती उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय मंत्री प्रो. अखिलेश मिश्र ने किया।

और पढ़ें : “परीक्षा पे चर्चा-2024” में विद्या भारती के छात्रों की भागीदारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here