बच्चों को अच्छी बातों को व्यवहार में अपनाना चाहिए – समृद्धि शिरगांवकर
विद्या भारती नागपुर महानगर का शिशु संगम उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।
गीता में श्रेयस और प्रेयस—ये दो शब्द आते हैं। जो हमें पसंद और प्रिय लगता है, वह प्रेयस है; लेकिन जो करना चाहिए और जो लोककल्याणकारी है, वह श्रेयस है। उस कार्य को मन से करते रहना चाहिए और अच्छी बातों को अपने आचरण में लाना चाहिए—यह प्रतिपादन अनुलोम संस्था की पूर्व विभाग संवादिनी तथा भारतीय शिक्षण मंडल की सदस्या सौ. समृद्धि शिरगांवकर ने किया। वे शुक्रवार को स्थानीय हेडगेवार स्मारक समिति के महर्षि व्यास सभागृह में आयोजित ‘शिशु संगम’ कार्यक्रम में अभिभावकों को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर शिशुओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी के उपलक्ष्य में नाटिका प्रस्तुत की, साथ ही पर्यावरण विषय पर विविध प्रकार के नृत्य एवं नाट्य प्रस्तुतियाँ दीं। शिशुओं की प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर सौ. शिरगांवकर ने आनंद व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मंच पर कार्यक्रमाध्यक्ष एवं विद्या भारती नागपुर महानगर के अध्यक्ष श्रीकांत देशपांडे, प्रांत शिशु वाटिका प्रमुख श्रीमती निर्मलाताई महाजन तथा नागपुर महानगर शिशु वाटिका प्रमुख सौ. संध्या अग्निहोत्री उपस्थित थीं। शिशुओं के विकास में माता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता ही पहली गुरु होती है। उसी के कारण बच्चे संस्कारित होते हैं। अगली पीढ़ी गुणों से युक्त हो—ऐसी अपेक्षा अध्यक्षीय भाषण में श्रीकांत देशपांडे ने व्यक्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती शिशु मंदिर, महाल की दिव्या जोगे और मनस्वी बोरकर द्वारा गाई गई सरस्वती वंदना से हुई। पूरे कार्यक्रम का सूत्रसंचालन पाँच वर्षीय बालिका श्रावणी दीपक कुकडे ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय वेदिता ने कराया। स्वागत अन्वी, माऊली, दीपय्या, केयूर और देवांशी ने किया तथा आभार प्रदर्शन त्रिशिका ने किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रांत उपाध्यक्ष सौ. प्रांजली जोशी, प्रांत मंत्री रोशन आगरकर, महानगर मंत्री संदीप पंचभाई, श्रीमती सुमेधा खोत, सौ. सीमा जोशी, सौ. वैदेही तारे, तथा केशवनगर सांस्कृतिक सभा के उपाध्यक्ष प्रकाश देशपांडे, संस्था संचालक मधुसूदन मुडे उपस्थित थे। कार्यक्रम की सफलता के लिए शिशु वाटिका की ताइयों और सेविकाओं ने परिश्रम किया। कार्यक्रम में लगभग 10 शिशु वाटिकाओं के 250 शिशुओं ने सहभाग लिया।






