संस्कार साधना विशेषांक का भव्य प्रकाशन
विद्या भारती के ‘परिवार प्रबोधन’ विशेषांक का सर्वत्र स्वागत
नागपुर: बच्चे के जन्म के बाद परिवार ही उसकी पहली पाठशाला होता है। अनेक गुणों का विकास परिवार में ही होता है। माँ और बड़ों का प्रेम, संस्कार और अनुशासन परिवार में ही प्राप्त होता है। परिवार में रहते हुए जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। इसलिए परिवार में ही जीवन मूल्यों को स्थापित करने का प्रयास सभी को करना चाहिए—यह प्रतिपादन राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय शारीरिक शिक्षा प्रमुख सौ. मनीषा संत ने किया। वे स्थानीय आर.एस. मुंडले इंग्लिश स्कूल में संपन्न संस्कार साधना विशेषांक के प्रकाशन समारोह में बोल रही थीं। छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि अपने परिवार में सामाजिक समरसता, ‘स्व’ का जागरण, नागरिक कर्तव्यों का पालन तथा पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली किस प्रकार विकसित की जा सकती है, और ये सब व्यवहार में उतरें—ऐसी अपेक्षा व्यक्त की।
इस अवसर पर मंच पर कार्यक्रम एवं विद्या भारती के अध्यक्ष सचिन जोशी, धरमपेठ शिक्षा संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट उल्हास औरंगाबादकर, नागपुर महानगर अध्यक्ष श्रीकांत देशपांडे, आर.एस. मुंडले इंग्लिश स्कूल समर्थ नगर की प्राचार्या श्रीमती लखबीर कौर सुरी, विशेषांक प्रमुख प्रकाश देशपांडे तथा अंक के संपादक डॉ. अंकेश शाहू उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत सौ. वैशाली सालोडकर द्वारा सरस्वती वंदना के गायन से हुई। इसके बाद विद्या भारती का परिचय महानगर सहमंत्री डॉ. अंकेश शाहू ने कराया। परिवार से जुड़े अनेक विषयों पर मार्गदर्शन करने वाले लेखों का संकलन होने के कारण संस्कार साधना विशेषांक सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होगा—यह विश्वास विशेषांक प्रमुख प्रकाश देशपांडे ने अपने मनोगत में व्यक्त किया। विशेषांक अत्यंत परिश्रम से तैयार किया गया है, इसलिए सभी को इसे अवश्य पढ़ना चाहिए—ऐसा आह्वान अध्यक्षीय भाषण में सचिन जोशी ने किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह अतुल मोघे, विद्या भारती विदर्भ व देवगिरी प्रांत संगठन मंत्री शैलेश जोशी, प्रांत मंत्री रोशन आगरकर, धरमपेठ प्रशिक्षण संस्था के उपाध्यक्ष दीपक दुधाने, सचिव सुरेश देव, विद्यालय के शिक्षकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा अभिभावक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सौ. संगीता तांबोली ने किया और आभार प्रदर्शन महानगर मंत्री संदीप पंचभाई ने किया। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






