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विद्यालय में कौशल विकास : एक प्रयास …

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सरस्वती ग्रामोदय विद्यालय गोविंदनगर

मध्य प्रदेश | सरस्वती ग्रामोदय गतिविधि आधारित विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों का विकास हो सके, इस हेतु से महती कार्य किये जा रहें है। विद्यालय परिवार कौशल विकास के लिये कृत संकल्पित है। हमारा प्रयास है कि विद्यालय का प्रत्येक छात्र किसी न किसी हस्त कौशल में निपुण हो सकें। इस हेतु से प्रशिक्षण कार्यशालायें एक साथ आयोजित की जा रही है जिससे विशेष शिक्षक तैयार हो सकें जो वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण कार्य करा सकें। कुछ विशेष पाठ्यक्रम विद्यालय द्वारा निर्धारित कियें है, जिससे छात्र स्किल्ड हो सकें। इनमें प्रमुख है बाँस कला, माटीकला, बढ़ई, करीगरी, विद्युत कार्य, प्लम्बिंग, बेल्डिंग एवं कृषि कार्य।

उपरोक्त कार्यों में निपुणता हेतु श्रेष्ठ प्रशिक्षकों की आवश्यकता होती है। कुछ कार्य विद्यालय में वर्षभर संचालित होते है जैसे बढ़ई, विद्युत आदि इन कार्यों के संचालन के समय छात्रों को प्रशिक्षक के साथ संलग्न किया जा सकता है किन्तु निरंतरता विद्यालय में विद्युत संबंधी कार्य सिखाने के लिये प्रशिक्षक नियुक्त है। जिनके कालांश तय होने के साथ- साथ विद्युत कार्यशाला भी है जहाँ बच्चे प्रेक्टिकल तथा थ्योरी दोनों प्रकार का अध्ययन करते है। साथी ही घरों मे खराब हुये विद्युत उपकरण एवं विद्यालय के खराब उपकरणों को प्रशिक्षण के मार्गदर्शन में सुधारते भी है। मोटर वाइंडिंग का कार्य वस्तुत: अलग है किन्तु उसे भी विद्यालय में विद्युत कार्यशाला सेजोड़ा गया है। जहाँ घर पर खराब हुई कूलर पंखों आदि की मोटर वाइडिंग प्लंबिंग का कार्य जैसे नलों की टोटियाँ, दिवारों पर बोर्ड लगाना, पर्दे आदि के कार्य ग्रुप बनाकर छात्रों द्वारा ही किये जाते है। संस्था से संबंधित कृषि विज्ञान केन्द्र भी है जहाँ कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में बच्चे कृषि कार्यों की बारिकियों को समझते है एवं उनको प्रायोगिक रूप से करके भी देखते हैं जिससें कृषि संबंधी कौशल का का व्यावहारिक ज्ञान उन्हें प्राप्त होता है। हमारे एक अन्य प्रकल्प ग्रामज्ञान पीठ के कारिगरों के माध्यम से बच्चे बाँसकला एवं माटीकला का व्यवहारिक प्रशिक्षण की प्राप्त कर रहें है जिसमें बाँस के डस्टबीन, लैंप, सजावटी सामान तथा मिट्टी से प्लेट, कुल्हड, कटोरी, मूर्ति एवं अन्य खिलौने बनाना सीखते है। विद्यालय में मेहंदी, रंगोली, सिलाई एवं पाककला जैसे दैनिक उपयोगी कौशलों के लिये समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किये जाते है। विद्यालय में बेल्डिंग कार्यों के लिये भी वर्कषाप उपलब्ध है । जहाँ बैल्डिंग का कार्य सिखाया जाता है। वृहद कम्प्यूटर प्रयोगशाला है जिससे बच्चों को कोडिंग के साथ-साथ अन्य पी.टी.पी. का कार्य आदि के साथ-साथ हिन्दी, अंग्रेजी टाईपिंग सिखाई जाती है।कौशल विकास के व्यवहारिक पाठ्यक्रमों से बच्चों में आत्मनिर्भरता आती है जो उन्हें आत्मविश्वास से भर देती है। जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में विद्यार्थी सक्षम बन पाते है।

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