Home अवध प्रांत थारू समाज की शिक्षा का अभिनव प्रयास

थारू समाज की शिक्षा का अभिनव प्रयास

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प्रताप नारायण मिश्र सरस्वती विद्या मंदिर | जन शिक्षा समिति अवध प्रान्त की पहल

चन्दन चौकी (लखीमपुर-खीरी, उत्तर प्रदेश)। भारत-नेपाल सीमा पर दुधवा नेशनल पार्क के उत्तर में देश का अंतिम गाँव है चन्दन चौकी। इसके उत्तरी छोर पर बह रहा नाला भारत-नेपाल की सीमा बनाता है। यहाँ प्रमुख रूप से थारू समाज की राणा, कठेरिया और चौधरी जाति के लोगों का निवास है। वर्ष 1988 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अवध प्रान्त के तत्कालीन प्रान्त प्रचारक प्रताप नारायण मिश्र पलिया के प्रवास पर आये थे। उस दौरान कार्यकर्ताओं ने उन्हें गौरी फंटा, सूडा, चन्दन चौकी आदि का भ्रमण कराया था। तब क्षेत्र में शिक्षा संस्थानों का अभाव था, सरकारी विद्यालय भी नहीं थे, लेकिन सरकार ने थारू जाति विकास संस्थान के अन्तर्गत कुछ प्राथमिक विद्यालय खोले थे, जो अपर्याप्त थे। श्री प्रताप की इच्छा के अनुरूप चन्दनचौकी में फूल सिंह राणा के छप्पर के नीचे विद्या भारती का विद्यालय खोला गया और शिशु प्रथम की कक्षायें प्रारम्भ की गईं। प्रथम प्रधानाचार्य केशव प्रसाद ने परिश्रमपूर्वक सत्रभर कार्य किया। बाद में राम किशोर मिश्र प्रधानाचार्य बने। स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी पट्टे की जमीन विद्यालय के लिए उपलब्ध कराई जहां आज प्रताप नारायण मिश्र सरस्वती विद्या मंदिर चल रहा है और अब विद्यालय में 24 कमरे हैं। विद्यालय को शासन से कक्षा अष्टम् तक मान्यता प्राप्त है।

भविष्य की योजना

  • चन्दन चौकी में गो-पालन एवं गो-संवर्द्धन केन्द्र की स्थापना।
  • जैविक खाद बनाना, किसानों को प्रशिक्षित करना, रासायनिक खादों का प्रयोग कम कर अधिक उपज हेतु प्रशिक्षण।
  • औषधीय पौधों के माध्यम से चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने का केन्द्र एवं भाऊराव देवरस न्यास द्वारा होम्योपैथिक चिकित्सालय का संचालन
  • बालिकाओं के स्वावलम्बन हेतु 10 सिलाई-कढ़ाई केन्द्र स्थापित करना।
  • 23 ग्रामों में साप्ताहिक सुन्दरकाण्ड एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराना।
  • 23 संस्कार केन्द्र चलाना।

विद्यालय में माननीय राज्यपाल द्वारा बीते 21 नवंबर को 30 कम्प्यूटर की प्रयोगशाला का लोकार्पण किया गया था। यहां दूर से आने वाले बच्चों के लिए निःशुल्क छात्रावास भी बनाया गया है जिसमें 50 छात्र निवास करते हैं। चंदन चौकी के इस विद्यालय को आधार मानकर विरिया. चूडापोवा पोटाला में छोटे-छोटे विद्यालय और 10 स्थानों पर संस्कार केन्द्र चल रहे हैं। लगभग 30 वर्षों में विद्या भारती के प्रयास से शिक्षण स्तर में परिवर्तन आया है, साक्षरता दर बढ़ी है, कुछ लोग नौकरी में हैं तो कुछ लोग स्थानीय स्तर पर व्यापार कर रहे हैं। जुआ खेलना, शराब बनाना एवं पीना, बाल विवाह, अन्धविश्वास में कमी आई है। थारू समाज के लोगों से बाहर के व्यक्तियों से भेदभाव कम हुआ है और अपनत्व का भाव विकसित हुआ है। विद्यालय में वर्ष 2006 में महाराणा प्रताप की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। थारू समाज महाराणा प्रताप जयन्ती मनाने के लिए विद्यालय में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करता है। कबड्डी रस्साकसी, थारू नृत्य, गायन, वादन में महिला-पुरूष दोनों भाग लेते हैं। थारु समाज के लोग सेना में भर्ती हेतु विशेष रुचि दिखाते हैं। ये लोग महाराणा प्रताप को अपना आदर्श मानते हैं और बड़े गर्व से बताते हैं कि हमारे पूर्वजों ने राणा की सेवा और सुरक्षा उस समय की थी जब राणा महलों को छोडकर जंगलों में रहकर जीवनयापन कर रहे थे।

चुनौतियां

क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों, चर्चों एवं मुस्लिमों के बढ़ते अतिक्रमण। आर्थिक स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन गरीबों को थोड़ी आर्थिक सहायता कर उनके खेतों पर कब्जा, नेपाल सीमा से तस्करी हेतु गरीबों को माध्यम बनाना आदि। इन चुनौतियों का सामना प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है और भविष्य में इसमें सुधार होने की आशा है।

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