जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम जी ने कहा कि देश में आधुनिकता-प्रगतिशीलता के नाम पर ‘अरबन नक्सलियों’ के रूप में एक लिबरल फौज खड़ी हो गई है जो यदा-कदा भारत को नीचा दिखाने का काम करती है। ये लोग सोचते हैं कि भारत का अपना तो कुछ था ही नहीं। अंग्रेज आ गए जो भारत का कायाकल्प करके चले गए। ऐसी सोच रखने वालों को एक बार भारत का इतिहास अवश्य पढ़ना चाहिए।
बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित आदर्श विद्या मंदिर के पूर्व छात्रों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम जी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अपेक्षा है कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए। आदर्श विद्या मंदिर के पूर्व छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज मंच पर जितने पूर्व छात्र विराजमान हैं वे सभी हिन्दी माध्यम से पढ़कर गए हैं और देश में शीर्ष स्थानों पर बैठकर नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। क्षेत्र प्रचारक जी ने नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सिर्फ किताबें ही नहीं पढ़ाई जाती थीं बल्कि सभी तरह का ज्ञान दिया जाता था। आज हमारे यहां जिसे कौशल विकास कहा जा रहा हैं, वो भी यहां सिखाया जाता था। शस्त्र विज्ञान की भी शिक्षा दी जाती थी। वैसा भारत फिर बनना चाहिए। केवल एक स्कूल या समिति से ये संभव नहीं हो सकता है, इसके लिए संपूर्ण समाज को भागीदार बनना होगा। वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला सफलतापूर्वक कर सकें, इस प्रकार के छात्रों का निर्माण विद्या भारती व आदर्श विद्या मंदिर करता है। इसका मतलब है देशकाल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ‘युगानुकुल शिक्षा’ दी जाए। इस पर विद्या भारती ने शुरू से ही जोर दिया है।
विशिष्ट अतिथि पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक गोपाल आर्य जी ने कहा कि क्या एक पूर्व छात्र के मन में ये विचार नहीं आते कि जहां मैंने शिक्षा ली, जहां मेरे अंदर संस्कारों का बीजारोपण हुआ उसके लिए मेरा भी कुछ कर्तव्य होना चाहिए। कैम्ब्रिज और आईआईटी संस्थान की एलुमनी कहते हैं कि मैं अपने संस्थान के लिए योगदान देता हूं। हमें भी अपनी क्षमतानुसार सहयोग करना चाहिए। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य भावी पीढ़ी को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकालना है। राष्ट्र के प्रति गर्व हो, यह भाव नई पीढ़ी में जगाना आवश्यक है।
स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ. एम.एल. स्वर्णकार, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनोज जोशी, डॉ. देवेंद्र भसीन ने भी विचार रखे। प्रबन्ध समिति के संजीव भार्गव ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की।
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